उतर आ, उतर आ, उतर आ
ऐ रूह-ए-पाक उतर आ
आसमानी खुशी से
भर दे मुझको
गीत नया दिल में ला
उतर आ...अमृत जल प्रभु
मुझको पिला दे
दिल मेरे की प्यास बुझा दे
चश्मा बन के उतर आ...
आसमानी रोटी
मुझको खिला दे
कमजोर दिल को तगड़ा बना दे
भरपूर करदे राजा…पाक रूह आ
मेरे दिल के अंदर
बन जाऊँ मैं तेरा मंदिर
अपनी राह दिखा...
--Uttar aa uttar aa--